चांदी की कीमत ने MCX पर 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर पार कर नया रिकॉर्ड बनाया, जहां एक ही दिन में 15,557 रुपये का उछाल दर्ज हुआ; औद्योगिक मांग, आपूर्ति की कमी और भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारक बने, जबकि निवेशकों के लिए आगे 3.2 लाख तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
MCX पर चांदी के वायदा भाव ने 3,04,200 रुपये प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर छुआ, जो पिछले सत्र से 15,557 रुपये या 5.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। यह उछाल 2026 की शुरुआत से ही 28 प्रतिशत की कुल वृद्धि को रेखांकित करता है, जहां दिसंबर 2025 के अंत में कीमत 2,35,701 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
चांदी की इस तेजी के पीछे सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों से बढ़ती औद्योगिक मांग मुख्य भूमिका निभा रही है, जो वैश्विक आपूर्ति घाटे को और गहरा रही है। भू-राजनीतिक तनाव और ETF में बढ़ते निवेश ने सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की अपील बढ़ाई है। ब्रोकरेज फर्मों जैसे Motilal Oswal ने 3,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम का लक्ष्य तय किया है, जबकि SAMCO Securities ने 3,94,000 रुपये तक की संभावना जताई है।
भारतीय बाजार में चांदी की कीमतें प्रमुख शहरों में इस प्रकार हैं:
| शहर | कीमत (रुपये प्रति किलोग्राम) |
|---|---|
| दिल्ली | 3,05,000 |
| मुंबई | 3,05,000 |
| चेन्नई | 3,09,000 |
| कोलकाता | 3,05,000 |
| हैदराबाद | 3,09,000 |
| बेंगलुरु | 3,05,000 |
यह डेटा IBJA से संकलित है, जहां चेन्नई और हैदराबाद में स्थानीय करों के कारण मामूली अंतर दिख रहा है।
उछाल के प्रमुख कारण:
औद्योगिक उपयोग में वृद्धि: सिल्वर का 50 प्रतिशत से अधिक उत्पादन इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और EV बैटरी में इस्तेमाल होता है, जहां भारत की सोलर क्षमता 2026 में 150 GW तक पहुंचने की उम्मीद है।
आपूर्ति की कमी: वैश्विक खनन उत्पादन में 2-3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि मांग 10 प्रतिशत बढ़ी है।
निवेश मांग: SLV जैसे ETF में 2026 की शुरुआत से 500 टन से अधिक का प्रवाह दर्ज हुआ, जो कीमतों को ऊपर धकेल रहा है।
मुद्रास्फीति और दर कटौती: वैश्विक केंद्रीय बैंकों की दर कटौती की उम्मीदों ने कमोडिटी बाजार को मजबूती दी है।
आर्थिक प्रभाव: यह उछाल ज्वेलरी सेक्टर को प्रभावित कर रहा है, जहां मांग 15 प्रतिशत घटी है, लेकिन निवेशकों के लिए अवसर पैदा कर रहा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुधार पर खरीदारी करें, क्योंकि 2026 के अंत तक 10 प्रतिशत और वृद्धि संभव है। हालांकि, अस्थिरता बनी रहेगी, इसलिए जोखिम प्रबंधन आवश्यक है।
निवेशकों के लिए टिप्स:
शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स 2,96,737 रुपये के सपोर्ट स्तर पर नजर रखें, जो फिबोनाची एक्सटेंशन पर आधारित है।
लॉन्ग-टर्म निवेशक ETF या फ्यूचर्स में पोजीशन बनाएं, लेकिन 1,40,000 रुपये के नीचे स्टॉप-लॉस लगाएं।
विविधीकरण: चांदी को पोर्टफोलियो का 5-10 प्रतिशत रखें, सोने के साथ संतुलन बनाते हुए।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट और स्रोतों से प्राप्त टिप्स पर आधारित है।