“बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 के सिंगल जज बेंच के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है, जिससे बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक अब अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को फ्रॉड घोषित करने की कार्रवाई आगे बढ़ा सकते हैं। यह फैसला 2020 के फॉरेंसिक ऑडिट पर आधारित है, जिसमें फंड डायवर्शन के गंभीर आरोप लगे थे।”
अनिल अंबानी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका
बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े फ्रॉड क्लासिफिकेशन केस में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दिसंबर 2025 में सिंगल जज बेंच द्वारा दिए गए अंतरिम स्टे ऑर्डर को ‘गैरकानूनी’ और ‘पर्वर्स’ करार देते हुए रद्द कर दिया। इस स्टे से तीन पब्लिक सेक्टर बैंक – बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक – को अनिल अंबानी के खातों को फ्रॉड कैटेगरी में डालने से रोका गया था।
अब इन बैंकों और ऑडिट फर्म BDO India LLP को RBI के 2024 मास्टर डायरेक्शंस के तहत कार्रवाई करने की अनुमति मिल गई है। यह फैसला चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की बेंच ने दिया, जिसमें उन्होंने सिंगल जज के आदेश को प्रक्रियागत रूप से गलत बताया।
मामले की जड़ 2019 में है, जब SBI ने लीड लेंडर के रूप में BDO India LLP से RCom, Reliance Telecom और Reliance Infratel के खातों का फॉरेंसिक ऑडिट करवाया था। रिपोर्ट 15 अक्टूबर 2020 को आई, जिसमें फंड साइफनिंग और मिसयूज के गंभीर निष्कर्ष थे। इन कंपनियों पर 20 बैंकों का कुल एक्सपोजर करीब 31,580 करोड़ रुपये था, जबकि कुल लोन अमाउंट 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जाता है।
SBI ने जून 2025 में RCom और अनिल अंबानी को फ्रॉड घोषित किया था, क्योंकि अनिल अंबानी उस समय कंपनी के चेयरमैन, प्रमोटर और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। अन्य बैंक भी इसी रिपोर्ट के आधार पर शो-कॉज नोटिस जारी कर फ्रॉड क्लासिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर चुके थे।
दिसंबर 2025 में सिंगल जज जस्टिस मिलिंद जाधव ने अंतरिम राहत देते हुए कहा था कि फॉरेंसिक ऑडिट में गंभीर खामियां हैं और RBI गाइडलाइंस का उल्लंघन हुआ है। इस राहत से बैंकों की सभी मौजूदा और भविष्य की कार्रवाई रुक गई थी। बैंकों ने अपील की, जिसमें तर्क दिया कि ऑडिट वैध है और चुनौती देर से दी गई है।
डिवीजन बेंच ने अपील स्वीकार करते हुए कहा कि अंतरिम ऑर्डर कानूनी रूप से गलत था और इसे जारी रखना उचित नहीं। कोर्ट ने अनिल अंबानी की स्टे की मांग भी खारिज कर दी। फ्रॉड टैग लगने के परिणामस्वरूप RBI नियमों के तहत अनिल अंबानी को 5 साल तक नए बैंक क्रेडिट से वंचित किया जा सकता है।
यह फैसला अनिल अंबानी के लिए लगातार कानूनी चुनौतियों की श्रृंखला में नया मोड़ है। RCom पहले से इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में है और कई बैंकों के साथ डिफॉल्ट केस चल रहे हैं। फ्रॉड क्लासिफिकेशन से रिकवरी प्रक्रिया तेज हो सकती है और व्यक्तिगत स्तर पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्य तथ्य सारणी
फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट : 15 अक्टूबर 2020 (BDO India LLP द्वारा)
SBI फ्रॉड घोषणा : 13 जून 2025
अंतरिम स्टे ऑर्डर : दिसंबर 2025 (सिंगल जज बेंच)
डिवीजन बेंच फैसला : 23 फरवरी 2026
बैंक : Bank of Baroda, IDBI Bank, Indian Overseas Bank
कुल एक्सपोजर : लगभग 31,580 करोड़ रुपये (SBI कंसोर्टियम)
RBI नियम : 2024 Master Directions on Fraud Classification
Disclaimer : यह खबर उपलब्ध जानकारी और अदालती फैसलों पर आधारित है।