“खरीफ सीजन से पहले भारत का कुल उर्वरक भंडार रिकॉर्ड स्तर पर 177.31 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 36.5% अधिक है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति से घरेलू आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि मजबूत स्टॉक और पूर्व आयात के कारण किसानों को पर्याप्त खाद मिलेगी।”
उर्वरक भंडार में अभूतपूर्व वृद्धि
उर्वरक विभाग के अनुसार, 6 मार्च 2026 तक देश का कुल उर्वरक भंडार 177.31 लाख मीट्रिक टन (LMT) पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल इसी समय के 129.85 लाख मीट्रिक टन से 36.5 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि से खरीफ फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है।
मुख्य उर्वरकों की स्थिति इस प्रकार है:
यूरिया : 59.30 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध, जो सबसे अधिक उपयोग वाला उर्वरक है।
डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) : 25.13 लाख मीट्रिक टन, पिछले साल से काफी बेहतर।
एनपीके (NPK) : 55.87 लाख मीट्रिक टन, जिसमें जटिल उर्वरकों की मजबूत स्थिति है।
यह भंडार खरीफ मौसम (जून से शुरू) से पहले तैयार किया गया है, जब धान, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई होती है। विभाग ने कहा कि किसान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और उनके हितों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं होगा।
ईरान संकट का प्रभाव न्यूनतम
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधानों के बावजूद सरकार ने आश्वासन दिया है कि भारत की उर्वरक आपूर्ति सुरक्षित है। होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक उर्वरक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है, लेकिन भारत ने पहले से ही पर्याप्त स्टॉकिंग और आयात सुनिश्चित कर लिया है।
फरवरी 2026 तक 9.8 मिलियन मीट्रिक टन तैयार उर्वरकों का आयात हो चुका है, जबकि अगले तीन महीनों में 1.7 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक का अतिरिक्त आयात निर्धारित है। इससे घरेलू उत्पादन में किसी संभावित कमी को भी कवर किया जा सकेगा।
कुछ रिपोर्टों में वैश्विक स्तर पर यूरिया उत्पादन में कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव की बात कही गई है, लेकिन भारत का मजबूत बफर स्टॉक इसे प्रभावी ढंग से संभाल लेगा। सरकार ने किसानों से घबराने की जरूरत नहीं बताई है और कहा है कि आपूर्ति श्रृंखला स्थिर रहेगी।
किसानों के लिए उपलब्धता और सब्सिडी
सरकार ने पहले से ही उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था को मजबूत रखा है, जिससे यूरिया की कीमतें नियंत्रित हैं। डीएपी और एनपीके पर भी पोषक तत्व आधारित सब्सिडी लागू है। इस मजबूत भंडार से किसानों को बिना किसी कमी के समय पर खाद मिल सकेगी, जिससे फसल उत्पादकता प्रभावित नहीं होगी।
तैयारी और निगरानी
उर्वरक विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। यदि कोई वैश्विक व्यवधान लंबा खिंचता है, तो वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल, घरेलू उत्पादन और स्टॉक दोनों मजबूत स्थिति में हैं।
## किसान संगठनों को भी आश्वस्त किया गया है कि खरीफ बुवाई के लिए कोई संकट नहीं है।