“दिनभर में चांदी की कीमतों में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी 1.5% तक फिसल गया। वैश्विक बाजारों में मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेड रेट कट की उम्मीदों में कमी के कारण यह गिरावट आई है। निवेशकों के लिए यह सुधार का मौका हो सकता है, लेकिन अल्पावधि में अस्थिरता बनी रहेगी।”
सोना-चांदी में बड़ी गिरावट: कारण और निवेश रणनीति
भारतीय सर्राफा बाजार में गुरुवार को कीमती धातुओं में तेज गिरावट देखी गई। चांदी की कीमतें एक दिन में करीब 5% टूटकर 2.55 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गईं, जबकि सोना 1.5% गिरकर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक कारकों से प्रभावित रही, जहां अमेरिकी मजबूत रोजगार डेटा ने फेडरल रिजर्व से जल्दी ब्याज दर कटौती की संभावनाओं को कमजोर किया।
MCX पर चांदी के मार्च कॉन्ट्रैक्ट में भारी बिकवाली देखी गई, जबकि सोने के अप्रैल और जून कॉन्ट्रैक्ट में मिश्रित रुख रहा। स्थानीय बाजार में मांग कमजोर होने से भी कीमतों पर दबाव बढ़ा। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट आई, जो कुल 5.03% का नुकसान दर्शाती है।
मुख्य कारण
मजबूत अमेरिकी डॉलर : अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल डेटा में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ने और बेरोजगारी दर 4.3% पर आने से डॉलर इंडेक्स में उछाल आया। इससे डॉलर में मूल्यांकित सोना-चांदी महंगे हो गए, जिससे बिकवाली बढ़ी।
फेड नीति की अनिश्चितता : अमेरिकी फेड चेयर के रूप में केविन वार्श की नियुक्ति की चर्चा से बाजार में हॉकिश रुख की उम्मीद बढ़ी। इससे रेट कट की संभावना घटी और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की अपील कम हुई।
प्रॉफिट बुकिंग : जनवरी-फरवरी में सोने और चांदी में रिकॉर्ड उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली की। चांदी पहले ही 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार जा चुकी थी, जिसके बाद सुधार स्वाभाविक रहा।
वैश्विक बाजार प्रभाव : COMEX पर सोना 4,880 डॉलर प्रति औंस तक गिरा, जबकि चांदी में 10% तक की गिरावट आई। भारत में भी यही ट्रेंड फॉलो हुआ।
शहरवार भाव (24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम और चांदी प्रति किलो)
दिल्ली: सोना ≈ 1,59,760 रुपये, चांदी ≈ 2,55,000-2,89,900 रुपये (टैक्स सहित भिन्नता)
मुंबई: सोना ≈ 1,59,610 रुपये, चांदी ≈ 2,55,000-2,75,000 रुपये
चेन्नई/कोलकाता: समान रेंज में गिरावट, स्थानीय टैक्स के कारण मामूली अंतर
निवेशकों के लिए सलाह
अल्पावधि में अस्थिरता बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिकी इन्फ्लेशन डेटा और फेड की नीतियां बाजार को प्रभावित करती रहेंगी। हालांकि लंबी अवधि में सोना-चांदी मजबूत बने रहने की संभावना है।
खरीदारी का मौका : गिरावट में डिप्स पर खरीदें, खासकर 1.55-1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम सोने और 2.50-2.60 लाख प्रति किलो चांदी के स्तर पर।
पोर्टफोलियो बैलेंस : कुल निवेश का 10-15% सोने-चांदी में रखें। ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प सुरक्षित हैं।
चांदी पर फोकस : इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स) से चांदी में तेज रिकवरी की संभावना अधिक।
जोखिम प्रबंधन : स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करें, क्योंकि वैश्विक घटनाएं (ट्रंप नीतियां, भू-राजनीतिक तनाव) कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
वैकल्पिक : डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF में निवेश से भौतिक स्टोरेज की चिंता कम होती है।
यह गिरावट पिछले रिकॉर्ड हाई से सुधार का हिस्सा लगती है। मजबूत फंडामेंटल्स (सेंट्रल बैंक खरीदारी, भू-राजनीतिक अनिश्चितता) लंबे समय में कीमतों को समर्थन देंगे। निवेशक धैर्य रखें और सूचित निर्णय लें।