India-US Trade Deal: PM मोदी ने ट्रंप को कॉल क्यों नहीं किया? अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्टर का चौंकाने वाला खुलासा!

“अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया कि इंडिया-यूएस ट्रेड डील इसलिए अटक गई क्योंकि PM मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया; भारत ने खारिज किया, कहा 2025 में दोनों лидерों ने 8 बार बात की; ट्रेड टॉक जारी लेकिन डील फाइनल नहीं हुई।”

अमेरिकी मंत्री का दावा: PM मोदी के कॉल न करने से रुकी डील

अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि इंडिया-यूएस ट्रेड डील लगभग सेट हो चुकी थी, लेकिन PM नरेंद्र मोदी ने प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप को डायरेक्ट कॉल नहीं किया, जिससे बात आगे नहीं बढ़ी। लुटनिक के मुताबिक, यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद होती, जिसमें टैरिफ रिडक्शन, इन्वेस्टमेंट बढ़ावा और टेक्नोलॉजी शेयरिंग शामिल थी। उन्होंने जोर दिया कि मोदी की तरफ से कोई पहल न होने से अमेरिका को लगा कि भारत की रुचि कम है, जिससे नेगोशिएशन रुक गई।

भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 2025 में PM मोदी और ट्रंप के बीच 8 बार बातचीत हुई, जिसमें ट्रेड इश्यूज पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉल्यूम 2025 में 200 बिलियन डॉलर से ऊपर पहुंचा, लेकिन कुछ पेंडिंग इश्यूज जैसे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और एग्रीकल्चर सब्सिडी पर असहमति बनी रही।

ट्रेड डील के प्रमुख पॉइंट्स और बैरियर्स

ट्रेड डील में शामिल होने वाले मुख्य सेक्टर्स:

सेक्टरसंभावित लाभबैरियर्स
टेक्नोलॉजीAI और सेमीकंडक्टर में पार्टनरशिप, 50% इन्वेस्टमेंट ग्रोथडेटा लोकलाइजेशन रूल्स
एग्रीकल्चरभारतीय एक्सपोर्ट्स में 30% बढ़ोतरीअमेरिकी टैरिफ ऑन डेयरी प्रोडक्ट्स
मैन्युफैक्चरिंगमेक इन इंडिया को बूस्ट, 1 मिलियन जॉब्सस्टील और एल्युमिनियम पर 25% ड्यूटी
सर्विसेजIT आउटसोर्सिंग में 40 बिलियन डॉलर एक्स्ट्रा रेवेन्यूH-1B वीजा रेस्ट्रिक्शंस

लुटनिक ने आगे कहा कि अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी के तहत भारत से ऑयल ट्रेड पर 50% टैरिफ लगाए गए, जो रूस से डील के कारण थे, लेकिन मोदी की साइलेंस ने इसे और जटिल बना दिया। भारत की ओर से जवाब में कहा गया कि ट्रेड नेगोशिएशन जारी हैं और जल्द ही प्रोग्रेस की उम्मीद है, खासकर iCET इनिशिएटिव के तहत।

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क्या होगा आगे? की पॉसिबल सिनेरियो

अगर डील होती है: दोनों देशों का GDP ग्रोथ 1-2% बढ़ सकता है, खासकर EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर्स में।

अगर नहीं होती: भारत चाइना+1 स्ट्रैटजी के तहत वियतनाम और इंडोनेशिया की तरफ शिफ्ट हो सकता है, जबकि अमेरिका यूरोपीय यूनियन से ज्यादा ट्रेड करेगा।

एक्सपर्ट्स का अनुमान: 2026 के पहले क्वार्टर में कोई ब्रेकथ्रू हो सकता है, अगर दोनों साइड्स से हाई-लेवल मीटिंग्स होती हैं।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट सूत्रों पर आधारित है।

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