“वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्यों को करों के विभाज्य पूल का पूरा 41% हिस्सा दे रही है। वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को कुल 25.44 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे, जो पिछले वर्ष से 2.7 लाख करोड़ रुपये अधिक है। बजट में किसानों की आय बढ़ाने, उर्वरक सब्सिडी और मत्स्य पालन पर जोर के साथ-साथ रोजगार सृजन के लिए मेडिकल हब, पशुपालन और एमएसएमई क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा दावा: राज्यों को मिलता है पूरा पैसा, किसानों और रोजगार पर सरकार का मजबूत फोकस
लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि केंद्र राज्यों को उनकी कर हिस्सेदारी का पूरा पैसा नहीं दे रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार राज्यों को केंद्रीय करों के विभाज्य पूल का 41% हिस्सा नियमित रूप से हस्तांतरित किया जा रहा है और किसी भी राज्य का हिस्सा घटाया नहीं गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को कुल संसाधन हस्तांतरण 25.44 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें कर हस्तांतरण के अलावा केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राशि शामिल है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.7 लाख करोड़ रुपये अधिक है, जो राज्यों के विकास कार्यों के लिए मजबूत वित्तीय समर्थन दर्शाता है। वित्त मंत्री ने कहा कि सेस और सरचार्ज विशेष उद्देश्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए लगाए जाते हैं और इनका उपयोग राज्यों में ही विकास परियोजनाओं के लिए होता है, न कि केंद्र के पास जमा रहता है।
किसानों के कल्याण पर सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की कमी न हो। बजट में उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे नारियल, काजू और मखाना को बढ़ावा देने की घोषणाएं की गई हैं, जिससे लाखों किसानों की आय में वृद्धि होगी। मत्स्य पालन क्षेत्र में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास प्रस्तावित है, जो तटीय राज्यों के किसानों और मत्स्य पालकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
रोजगार सृजन के क्षेत्र में बजट ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 5 रीजनल मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे, जिससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और लगभग 1 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। इसके अलावा 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षित करने की योजना है। पशुपालन क्षेत्र में क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम के तहत लाइवस्टॉक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। मेगा टेक्सटाइल पार्क्स, फूड पार्क्स और आईटी पार्क्स स्थापित करने में राज्यों के साथ केंद्र सहयोग करेगा। स्किल डेवलपमेंट पर फोकस से युवाओं को रोजगार योग्य बनाया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि बजट का कुल व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो जीडीपी का 3.1% है।
राज्यों को प्रमुख हस्तांतरण (2026-27 अनुमानित):
कुल कर हस्तांतरण और अन्य संसाधन: 25.44 लाख करोड़ रुपये
पिछले वर्ष से वृद्धि: 2.7 लाख करोड़ रुपये
वित्त आयोग अनुदान: 1.4 लाख करोड़ रुपये (ग्रामीण-शहरी स्थानीय निकाय और आपदा प्रबंधन शामिल)
अन्य अनुदान: 17.1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया
किसानों और रोजगार से जुड़ी प्रमुख घोषणाएं:
उर्वरक सब्सिडी: 1.71 लाख करोड़ रुपये
मेडिकल हब: 5 नए हब, 1 लाख रोजगार
पशुपालन स्टार्टअप और FPO: क्रेडिट सब्सिडी
मत्स्य पालन: 500 जलाशयों का विकास
उच्च मूल्य फसलें: नारियल, मखाना, चंदन खेती को बढ़ावा
यह बजट विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में मजबूत कदम है, जहां राज्यों को वित्तीय संसाधन, किसानों को आय सुरक्षा और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
Disclaimer: यह लेख समाचार और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है।