” अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन द्वारा IEEPA के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। Penn-Wharton Budget Model के अनुमान से 175 अरब डॉलर से अधिक की वसूली अब रिफंड के दायरे में आ गई है, लेकिन कोर्ट ने रिफंड प्रक्रिया पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया। इंपोर्टर्स अब कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दावे दायर कर रहे हैं, जबकि ट्रंप ने नए 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर राजस्व की भरपाई की कोशिश की है। “
ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और रिफंड का सवाल
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को दिए गए फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के जरिए लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थिति में विदेशी खतरों से निपटने की शक्ति देता है, लेकिन टैरिफ लगाने जैसी राजस्व संबंधी कार्रवाई के लिए स्पष्ट अधिकार नहीं देता। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि टैरिफ लगाना कांग्रेस का विशेष क्षेत्र है, जिसे राष्ट्रपति एकतरफा नहीं छीन सकते।
यह फैसला ट्रंप के ‘Liberation Day’ टैरिफ और अन्य आपातकालीन टैरिफ को सीधे प्रभावित करता है, जिनमें कनाडा, मैक्सिको और चीन से आयात पर 25% तक तथा अन्य देशों पर 10% से अधिक की दरें शामिल थीं। इन टैरिफ से अमेरिकी सरकार ने भारी राजस्व जुटाया, लेकिन अब यह राशि विवादास्पद हो गई है।
Penn-Wharton Budget Model के अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि IEEPA के तहत वसूली गई कुल राशि 175 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुकी है। दिसंबर 2025 तक U.S. Customs and Border Protection के आंकड़ों से यह राशि करीब 133 अरब डॉलर थी, लेकिन फरवरी 2026 तक अतिरिक्त संग्रह के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 160-179 अरब डॉलर के बीच पहुंच गया। कुछ अनुमान 200 अरब डॉलर तक की कुल वसूली का जिक्र करते हैं, जिसमें से अधिकांश IEEPA टैरिफ से जुड़ी है।
कोर्ट ने फैसले में रिफंड पर चुप्पी साध ली, जिससे मामला निचली अदालतों में चला गया। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने अपने असहमति वाले फैसले में चेतावनी दी कि रिफंड की प्रक्रिया ‘mess’ साबित हो सकती है। इंपोर्टर्स को अब Court of International Trade में दावे दायर करने होंगे, जहां 180 दिनों की समयसीमा के भीतर प्रोटेस्ट फाइल किया जा सकता है। हजारों कंपनियां पहले से ही मुकदमे दायर कर चुकी हैं, और नए दावों की बाढ़ आने की संभावना है।
रिफंड मुख्य रूप से अमेरिकी इंपोर्टर्स को मिलेगा, जो टैरिफ चुकाते हैं। कई मामलों में ये कंपनियां लागत को उपभोक्ताओं पर डाल चुकी हैं, इसलिए आम अमेरिकी परिवारों को सीधा लाभ मिलना मुश्किल है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिफंड प्रक्रिया वर्षों चल सकती है, जिसमें दस्तावेज सत्यापन, गणना और अपील शामिल होंगी।
ट्रंप प्रशासन ने फैसले के तुरंत बाद प्रतिक्रिया देते हुए Section 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया, जो 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। ट्रंप ने कहा कि इससे राजस्व की कमी पूरी हो जाएगी और पुराने टैरिफ से जुड़े ट्रेड डील बरकरार रहेंगे। हालांकि, नए टैरिफ भी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए यह फैसला मिश्रित है। भारत पर लगे कुछ सेकेंडरी टैरिफ प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन रिफंड मुख्य रूप से अमेरिकी इंपोर्टर्स को जाएगा। भारतीय कंपनियां जो अमेरिका में सामान बेचती हैं, उनके अमेरिकी पार्टनर रिफंड क्लेम कर सकते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष लाभ हो सकता है।
मुख्य बिंदु
टैरिफ की कुल वसूली : 175 अरब डॉलर+ (Penn-Wharton अनुमान), जिसमें से अधिकांश IEEPA से।
कोर्ट का फैसला : 6-3 बहुमत, IEEPA टैरिफ अवैध।
रिफंड की स्थिति : कोर्ट ने निर्देश नहीं दिया, निचली अदालत में प्रक्रिया।
ट्रंप की प्रतिक्रिया : नया 10% ग्लोबल टैरिफ लागू।
आर्थिक प्रभाव : रिफंड से ट्रेजरी पर दबाव, लेकिन नए टैरिफ से राजस्व स्थिर रहने की उम्मीद।
Disclaimer : यह समाचार रिपोर्ट वर्तमान घटनाक्रम और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है।