Union Budget 2026 से पहले धराशायी हुआ भारत का रुपया, डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 92 के निचले स्तर पर पहुंचा

“भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरा, जिसके पीछे वैश्विक आर्थिक दबाव, FII आउटफ्लो और बजट पूर्व अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। इससे आयात महंगा होगा, जबकि निर्यातकों को फायदा मिल सकता है, लेकिन समग्र अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है।”

भारतीय रुपया आज डॉलर के मुकाबले 92.05 पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट पिछले 24 घंटों में 1.2 प्रतिशत की है, जबकि पिछले एक महीने में रुपया 3.5 प्रतिशत कमजोर हुआ है। वैश्विक स्तर पर US Federal Reserve की ब्याज दरों में बढ़ोतरी और चीन-अमेरिका व्यापार तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत पर दबाव बढ़ा है।

FII ने जनवरी में अब तक 15,000 करोड़ रुपये की निकासी की है, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में दोगुनी है। तेल की कीमतें Brent Crude के 85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने से भारत का आयात बिल बढ़ा है, क्योंकि देश 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। इससे current account deficit 2.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

बजट 2026 से पहले यह गिरावट चिंताजनक है, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि सरकार fiscal deficit को 4.5 प्रतिशत तक घटाएगी, लेकिन उच्च ब्याज दरों के कारण borrowing cost बढ़ गई है। RBI ने रुपए को सपोर्ट करने के लिए 5 बिलियन डॉलर की intervention की, लेकिन यह पर्याप्त नहीं साबित हुआ।

रुपए की गिरावट के प्रमुख कारण

वैश्विक फैक्टर : US डॉलर इंडेक्स 105 के ऊपर पहुंचा, जो पिछले दो साल का उच्चतम स्तर है। यूरोपीय संघ की मंदी और जापान की yen की कमजोरी ने डॉलर को मजबूत किया।

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घरेलू दबाव : स्टॉक मार्केट में Sensex 2 प्रतिशत गिरकर 75,000 के नीचे आया, जबकि Nifty 1.8 प्रतिशत टूटा। IT और pharma सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हुए।

बजट अनिश्चितता : विश्लेषकों का अनुमान है कि बजट में capital expenditure को 12 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन revenue shortfall के कारण रुपए पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

मुद्रास्फीति का असर : retail inflation 6.2 प्रतिशत पर है, जो RBI के 4-6 प्रतिशत target से ऊपर है, जिससे monetary policy सख्त हो सकती है।

समय अवधिUSD/INR दरप्रतिशत बदलावप्रमुख घटना
जनवरी 202585.50सामान्य स्तर
जुलाई 202588.20+3.2%FII inflow बढ़ा
दिसंबर 202590.10+2.1%तेल कीमतें बढ़ीं
जनवरी 2026 (आज)92.05+2.1%बजट पूर्व दबाव

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव निर्यातक सेक्टर जैसे textiles और gems & jewellery को फायदा होगा, क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में बढ़ेगी। अनुमान है कि FY26 में exports 10 प्रतिशत बढ़ सकते हैं। हालांकि, आयात-निर्भर उद्योग जैसे automobiles और electronics महंगे कच्चे माल से प्रभावित होंगे, जिससे कीमतें 5-7 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए petrol और diesel की कीमतें 2-3 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती हैं, जबकि gold की कीमतें 55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई हैं। tourism सेक्टर में विदेश यात्रा महंगी हो गई है, लेकिन inbound tourists बढ़ सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय SBI Research के अनुसार, रुपए की गिरावट GDP growth को 0.5 प्रतिशत तक घटा सकती है, अगर यह 95 तक जाती है। Moody’s ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को stable रखा, लेकिन currency volatility को जोखिम बताया। HDFC Bank के economist ने सुझाव दिया कि सरकार bond market में foreign investment को बढ़ाए।

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संभावित उपाय RBI forex reserves 650 बिलियन डॉलर पर हैं, जो 12 महीने के आयात को कवर करते हैं, इसलिए आगे intervention संभव है। बजट में export incentives जैसे PLI scheme का विस्तार हो सकता है। NRI deposits को आकर्षित करने के लिए higher interest rates की घोषणा की जा सकती है।

MSMEs के लिए currency hedging tools को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे volatility से बच सकें। स्टॉक मार्केट में short-selling restrictions लगाए जा सकते हैं।

सेक्टर-विशिष्ट प्रभाव

IT सेक्टर : dollar revenue बढ़ेगी, लेकिन global slowdown से contracts घट सकते हैं। TCS और Infosys जैसे stocks 3 प्रतिशत गिरे।

ऑयल & गैस : Reliance Industries का refining margin प्रभावित, लेकिन upstream business को फायदा।

बैंकिंग : NPA बढ़ सकता है, क्योंकि importers का debt burden बढ़ेगा। SBI और ICICI Bank के shares 2.5 प्रतिशत टूटे।

FMCG : imported ingredients महंगे होने से HUL और Nestle की margins दबाव में।

अगर गिरावट जारी रही, तो RBI repo rate को 6.75 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है, जिससे home loans महंगे होंगे। निवेशकों को gold ETFs और dollar-denominated bonds में diversify करने की सलाह दी जा रही है।

Disclaimer: यह लेख सूचना उद्देश्य से तैयार किया गया है और निवेश सलाह नहीं है। सभी डेटा सार्वजनिक स्रोतों से लिए गए हैं, लेकिन परिवर्तनशील हैं। पाठकों को स्वतंत्र सत्यापन करने की सलाह दी जाती है।

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