यूपी में आर्थिक असमानता की मार पूर्वांचल पर सबसे ज्यादा, जहां प्रतापगढ़ प्रति व्यक्ति आय में सबसे निचले पायदान पर है। 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक प्रतापगढ़ की सालाना प्रति व्यक्ति आय मात्र 44,544 रुपये रही, जबकि सिद्धार्थनगर, जौनपुर, बलिया और बहराइच भी टॉप 5 गरीब जिलों में शामिल हैं। ये जिले कृषि निर्भरता, उद्योगों की कमी और कम रोजगार के चलते पिछड़े हुए हैं, जबकि राज्य का औसत प्रति व्यक्ति आय इससे कई गुना ज्यादा है।
यूपी के सबसे गरीब जिले: प्रति व्यक्ति आय में पूर्वी यूपी का दबदबा
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में आर्थिक विकास की असमानता साफ नजर आती है। नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों (वित्त वर्ष 2023-24) के अनुसार, पूर्वी यूपी के जिले प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे पीछे हैं। प्रतापगढ़ जिला पूरे राज्य में सबसे गरीब साबित हुआ है, जहां प्रति व्यक्ति आय मात्र 44,544 रुपये रही। यह आंकड़ा राज्य के औसत प्रति व्यक्ति आय से काफी कम है, जो विभिन्न रिपोर्ट्स में 1 लाख रुपये से ऊपर दर्ज किया गया है।
इसके ठीक बाद सिद्धार्थनगर आता है, जहां प्रति व्यक्ति आय 46,322 रुपये रही। यह जिला भी पूर्वांचल में स्थित है और यहां कृषि मुख्य आजीविका है, लेकिन उत्पादकता कम होने से आय प्रभावित होती है।
तीसरे नंबर पर जौनपुर है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 46,836 रुपये (कुछ स्रोतों में 46,826 रुपये) बताई गई है। जौनपुर में जनसंख्या घनत्व ज्यादा है, लेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्र का अभाव रोजगार सृजन में बाधा बनता है।
चौथे स्थान पर बलिया जिला है, जहां प्रति व्यक्ति आय 47,067 रुपये रही। बलिया ऐतिहासिक महत्व रखता है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर पिछड़ापन जारी है।
पांचवें नंबर पर बहराइच आता है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 48,264 रुपये दर्ज की गई। ये सभी जिले पूर्वी उत्तर प्रदेश से हैं, जहां गरीबी और प्रवासन की समस्या गंभीर है।
| क्रमांक | जिला | प्रति व्यक्ति आय (रुपये, 2023-24) | मुख्य कारण पिछड़ापन |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रतापगढ़ | 44,544 | कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, उद्योगों की कमी |
| 2 | सिद्धार्थनगर | 46,322 | कम उत्पादकता वाली खेती, सीमित रोजगार |
| 3 | जौनपुर | 46,836 | उच्च जनसंख्या, सेवा क्षेत्र का अभाव |
| 4 | बलिया | 47,067 | औद्योगिक विकास न के बराबर |
| 5 | बहराइच | 48,264 | ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्रवासन अधिक |
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य के पश्चिमी और मध्य भाग (जैसे गौतम बुद्ध नगर, जहां प्रति व्यक्ति आय 10 लाख से ज्यादा है) तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि पूर्वी जिले पिछड़ते जा रहे हैं। प्रतापगढ़ में औद्योगिक इकाइयों की कमी, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि पर निर्भरता मुख्य वजहें हैं। यहां ज्यादातर लोग छोटे जोत वाली खेती करते हैं, जिसमें सिंचाई और आधुनिक तकनीक का अभाव है।
जौनपुर जैसे जिले में भी स्थिति समान है। यहां बड़ी आबादी होने के बावजूद बड़े पैमाने पर उद्योग नहीं हैं। युवा रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और कमजोर हो रही है।
राज्य सरकार ने पूर्वांचल में विकास के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जैसे एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और कौशल विकास कार्यक्रम, लेकिन इनका असर अभी इन जिलों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन जिलों में एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा दिया जाए, कृषि को वैल्यू एडिशन मिले और शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश बढ़े, तो प्रति व्यक्ति आय में सुधार संभव है।
पूर्वी यूपी के इन जिलों में बहुआयामी गरीबी भी ज्यादा है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर के संकेतक कमजोर हैं। राज्य स्तर पर प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, लेकिन क्षेत्रीय असमानता कम करने के लिए विशेष फोकस जरूरी है।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स और आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है। आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।