US कोर्ट से ट्रंप को करारा झटका! कंपनियों को रिफंड में लौटाने पड़ सकते हैं 16 लाख करोड़ रुपये; टैरिफ नीति पर अब लेने के देने पड़ गए

“अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ट्रंप की इमरजेंसी टैरिफ को असंवैधानिक घोषित किया, जिसके बाद यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने बुधवार को फैसला सुनाया कि सभी इंपोर्टर्स को रिफंड का हक है। सरकार पर 175 बिलियन डॉलर (करीब 16 लाख करोड़ रुपये) तक के रिफंड का बोझ पड़ सकता है, जो अमेरिकी ट्रेजरी के लिए बड़ा संकट है।”

US कोर्ट से ट्रंप को बड़ी मात! कंपनियों को रिफंड में चुकाने पड़ सकते हैं ₹16 लाख करोड़; टैरिफ पर पड़ गए लेने के देने

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक इमरजेंसी टैरिफ को अवैध ठहराया। कोर्ट ने माना कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। यह टैरिफ पिछले साल लगाए गए थे, जिनमें कई देशों पर 10-25% तक के रेसिप्रोकल और ग्लोबल ड्यूटी शामिल थे।

इस फैसले के बाद यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने 4 मार्च को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ “सभी इंपोर्टर्स ऑफ रिकॉर्ड” को मिलेगा। यानी हर वह कंपनी जो इन टैरिफ के तहत ड्यूटी चुकाई है, रिफंड की हकदार है। यह आदेश एक केस में आया, जिसमें टेनेसी की कंपनी Atmus Filtration ने रिफंड की मांग की थी, लेकिन इसका दायरा व्यापक है।

अमेरिकी सरकार ने IEEPA टैरिफ से मिड-डिसंबर तक 130 बिलियन डॉलर से ज्यादा जमा किए थे। पेन-व्हार्टन बजट मॉडल के अनुमान के अनुसार कुल रिफंड 175 बिलियन डॉलर (लगभग 14.8 लाख करोड़ से 16 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। यह राशि अमेरिकी ट्रांसपोर्टेशन और जस्टिस डिपार्टमेंट के सालाना खर्च से भी ज्यादा है।

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ट्रंप प्रशासन ने रिफंड प्रक्रिया को 90 दिनों के लिए टालने की कोशिश की, लेकिन फेडरल सर्किट कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया। अब रिफंड के लिए कंपनियां तेजी से केस दाखिल कर रही हैं। FedEx, Costco, L’Oreal, Dyson, Revlon और Bumble Bee Foods जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही मुकदमा कर चुकी हैं। FedEx ने घोषणा की है कि अगर उसे रिफंड मिला तो वह इसे शिपर्स और कंज्यूमर्स तक पहुंचाएगा।

ट्रंप ने इस फैसले को “भयानक” बताया और कहा कि रिफंड की राशि “सैकड़ों बिलियन” या “ट्रिलियन” तक हो सकती है, जो देश के लिए “मुश्किल” होगी। उन्होंने IEEPA टैरिफ की जगह नया 10% ग्लोबल टैरिफ सेक्शन 122 के तहत लगा दिया है, लेकिन पुरानी टैरिफ का रिफंड अब भी लंबित है।

भारतीय निर्यातकों के लिए यह राहत की खबर है। ट्रंप के पुराने टैरिफ से भारत पर 18% तक का बोझ था, जो अब हट गया है। भारत के 55% एक्सपोर्ट अब सिर्फ 15% टैरिफ का सामना कर रहे हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में छूट बरकरार है। भारत का प्रभावी टैरिफ रेट 11-13% रह गया है, जो चीन (15%+) से बेहतर है। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

रिफंड प्रक्रिया लंबी चल सकती है। ट्रेड लॉयर्स का मानना है कि अपील और स्टे की मांग से मामला सालों तक कोर्ट में अटक सकता है। छोटी कंपनियां रिफंड में पिछड़ सकती हैं, जबकि बड़ी कंपनियां तेजी से आगे हैं। कंज्यूमर्स को सीधा फायदा कम मिलने की संभावना है, क्योंकि ज्यादातर कंपनियां कॉस्ट पास-ऑन कर चुकी हैं।

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ट्रंप प्रशासन अपील की तैयारी में है, लेकिन कोर्ट के फैसले से टैरिफ नीति पर बड़ा असर पड़ा है। यह अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी में अनिश्चितता लाएगा और ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।

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